Mar 1, 2018

पंजाब में नवयुग का आगाज़


- डॉ . मुहम्मद अहमद
ऐसा नहीं है कि पंजाब में साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल पहली बार सामने आई हो , किन्तु आज के माहौल में निश्चय ही यह खबर किसी खुशखबरी से कम नहीं है ! दिलों को सकून पहुंचानेवाली यह खबर पंजाब के बरनाला जिले से आई है , जिसे सांप्रदायिक सद्भाव की बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है | ज़िले के मूम गांव में स्थानीय ब्राह्मणों ने पिछले दिनों 27 फ़रवरी 2018 को मस्जिद बनाने के लिए जमीन दान की है। यही नहीं सिख समुदाय के लोगों ने निर्माण कार्य के लिए चंदा भी इकट्ठा किया है। मस्जिद बनाने के लिए दो अन्य समुदायों के लोग भी मदद कर रहे हैं। इस तरह की कोशिश सद्भावना के नवयुग के रूप सबके सामने है | आज एक ओर जहाँ सामाजिक विध्वंस करने वाली ताक़तें लगातार अपना सिर उठा रही हैं , वही दूसरी ओर समाज को जोड़नेवालों की सक्रियता विशेष रूप से उल्लेखनीय है | लुधियाना जिले से सटे मूम गांव में मस्जिद के निर्माण की निगरानी कर रहे जसवीर खान के भाई नाज़िम खान कहते हैं, 'हम गांव में अब तक दो कमरों वाली बाबा मोमिन शाह की दरगाह में नमाज़ पढ़ते थे | स्थानीय ब्राह्मण बिरादरी के लोगों ने जमीन दान की, जिसके बाद हमने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने सिर्फ हमें जमीन नहीं दी , बल्कि वे निर्माण कार्य में भी हमारा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने हमारे लिए चंदा भी जुटाया है। इससे लगता है कि जल्द ही मस्जिद का निर्माण - कार्य पूरा हो जाएगा | हम उनका तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं | उक्त गांव में सिख समुदाय के लगभग चार हजार लोग रहते हैं , जबकि मुसलमानों और हिंदुओं की संख्या लगभग चार सौ है। गांव के सरपंच मनजीत कौर कहते हैं कि हमारा गांव सामाजिक समरसता एवं सद्भावना की एक मिसाल है। निर्माण - कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे और आयुर्वेद के व्यवसाय से जुड़े पंडित पुरुषोत्तम लाल कहते हैं कि 'मंदिर निर्माण के लिए दान करके हमारे वर्ग ने अपना फर्ज निभाया है। हम गांव में एक शिव मंदिर बना रहे हैं और हमारे गांव में गुरुद्वारा भी है। इस वजह से हमारा ख्वाब था कि गांव में एक मस्जिद भी बनाई जाए। हमारा मानना है कि सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान होना चाहिए। यही नहीं एक पंजाबी होने के नाते हमें बचपन से ही सभी के सम्मान की शिक्षा मिली है। धर्मनिरपेक्ष होने पर हमें गर्व है।' कुछ ऐसी ही सद्भावना कुछ समय पहले फरीदाबाद [ हरियाणा ] के ददसिया गाँव में देखने को मिली थी , जब वहां की गुलज़ार मस्जिद का विस्तारीकरण हुआ था और मंदिर के पुजारी पंडित सत्यनारायण मिश्रा की उपस्थिति में और मस्जिद के इमाम कारी उस्मान द्वारा दुआ कराकर ग्रामीणों ने हिंदू - मुस्लिम सद्भावना और भाईचारे की मिसाल पेश की गई थी। मस्जिद में नमाज के लिए स्थान कम पड रहा था, जिसके लिए युवा समाजसेवी दीपक त्यागी ने मस्जिद के पास का 100 गज का प्लॉट मस्जिद के लिए दान कर दिया है। इस अवसर पर युवा उद्यमी दीपक त्यागी ने कहा था कि हमारा गांव हिंदु बाहुल्य गांव हैं जिसमें त्यागी बिरादरी ज्यादा है। यहां के मुसलमानों के लिए मस्जिद में नमाज़ के लिए जगह कम होने के बारे में मुझे पता चला| कई मुसलमान भाई एकत्रित होकर मेरे पास आए , तो मैने मस्जिद के साथ लगते हुए अपने प्लाट में से 100 गज जमीन मस्जिद को दान कर दिया , जिसे मस्जिद प्रबन्धन ने सांकेतिक रूप से खरीदी दिखाकर पेपर बनवा लिया। दानकर्ता श्री त्यागी ने कहा था कि हमारे गांव में कभी भी हिन्दू - मुसलमान झगडे नही हुए | हम चाहते है कि यह भाईचारा व सौहार्द गांव में आगे भी बना रहे। इस अवसर पर पंडित सत्यनारायण मिश्रा ने कहा था कि 'हम लोग धर्म के आधार पर किसी के साथ कभी भेदभाव नहीं करते | सभी का सम्मान करते हैं | यही हमारी परंपरा है | ' काश , ऐसा ही सद्भावपूर्ण हमारा देश बने , जिसमें नफ़रत की गुंजाइश तक न बाक़ी रहे |

Nov 14, 2017

और अब आमद खान

डॉ . मुहम्मद अहमद
'' माब लिंचिंग '' अर्थात भीड़ द्वारा की जा हत्याओं का सिलसिला अभी थम नहीं सका है पिछले दिनों पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में इसी नृशंस - निंदनीय अम्ल को दोहराया गया इस हत्याकांड का विवरण कुछ इस प्रकार है -
राजस्थान के लोकगायक आमद खान के सुर पर जब देवी नहीं प्रकट हुईं तो भोपा को लगा कि खान जान - बूझकर सही सुर नहीं निकाल रहा है इसी बात पर आमद ख़ान को कथित तौर पर पीट-पीट कर मार डाला गया पुलिस ने भोपे को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन इस घटना से डरे सहमे मांगणियार बिरादरी के कोई डेढ़ दर्जन परिवारों ने गांव छोड़ कर जैसलमेर शहर में पनाह ली है |
इस घटना के बाद जैसलमेर के दांतल गांव में उन घरो में ख़ामोशी है लोग अपने पुश्तैनी घर छोड़ने को मजबूर हैं जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक गौरव यादव के मुताबिक़ , "भोपा रमेश सुथार को गिरफ्तार कर लिया गया है पुलिस अभी एक और आरोपी की सघनता के साथ तलाश कर रही है |"
पुलिस के अनुसार यह घटना 27 सितंबर को हुई जब नवरात्रि जागरण में भोपे रमेश ने आमद ख़ान को एक ख़ास राग छेड़ने को कहा बताया जाता है कि आमद खान ने अपनी सुर - साधना का सामर्थ्य भर प्रदर्शन किया मगर इसे भोपे को संतुष्ट न कर सका भोपा उसे डांटने - फटकारने लगा कहने लगा कि तुम्हारी लापरवाही से ही देवी प्रकट नहीं हुई इसके बाद वह अन्य लोगों के साथ आमद पर टूट पड़ा और काफ़ी मारा - पीटा |
जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने मीडिया को बताया कि आमद खान का दोबारा अपहरण किया गया फिर इतना पीटा गया कि उनकी जान चली गई उनका वाद्य - यंत्र और साज भी तोड़ दिया गया पुलिस अधीक्षक ने बताया कि "पुलिस को जब घटना की जानकारी मिली तो क्षेत्र के थानाधिकारी ने दांतल जाकर पूछताछ की इसमें अमद के परिजनों ने इसे प्राकृतिक मौत बतायालेकिन चार दिन बाद उनकी रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया |" मामले की विवेचना जारी है |
अगले दिन उनका शव उनके घर के सामने पड़ा मिला गांव के राजपूतों पर आरोप है कि उन्होंने ख़ान के परिवार को धमकी दी थी कि अगर उसने एफआईआर करवाई तो अंजाम अच्छा नहीं होगा इसके बाद परिवार ने ख़ान के शव को चुपचाप दफ़ना दिया था. हालांकि पड़ोस के गांव से आए रिश्तेदारों के कहने पर उन्होंने रमेश सुथार और उसके दो भाइयों के ख़िलाफ़ पुलिस में केस दर्ज करा दिया मुख्य आरोपी रमेश तांत्रिक है पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है उसके भाई फ़िलहाल फ़रार हैं |
ताज़ा सूरते हाल यह है कि दंतल गांव से मुस्लिम लोक गायकों के 20 परिवार गांव से निकाले जाने के बाद अब दो वक्त की रोटी के संकट का सामना कर रहे हैं अंग्रेज़ी दैनिक '' हिन्दुस्तान टाइम्स '' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दंतल नाम के इस गांव में एक मुस्लिम लोक गायक आमद ख़ान की कथित हत्या के बाद ऊंची जाति के लोगों की ओर से मिल रही धमकी के चलते इन परिवारों को मजबूरी में अपने घर छोड़ने पड़े |
ज़िला प्रशासन ने उनके लिए जैसलमेर में अस्थायी शिविर बनाए थेलेकिन यह भी खबर आई थी कि बीते दो दिनों से इन लोगों को ख़ाना मुहैया नहीं कराया है ज़िला प्रशासन का कहना है कि उसके पास बजट नहीं है जैसलमेर नगर पालिका के आयुक्त जबर सिंह का कहना है कि उनके पास विस्थापित परिवारों को खाना मुहैया कराने के लिए बजट नहीं है खाना और अन्य सुविधाओं की कमी के चलते करीब 150 लोग संकट में हैं |
दूसरी ओर इन लोगों का कहना है कि वे गांव वापस नहीं जाना चाहते उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वह इन्हें किसी दूसरी सुरक्षित जगह भेज दे ज़िला प्रशासन का कहना है कि गांव के हालात सामान्य करने के लिए वह दोनों तरफ़ के लोगों से बात कर रहा है ,जिसमें कुछ प्रगति भी हुई है वास्तव में सभी नागरिकों कि सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन - प्रशासन का काम है क़ानून - व्यवस्था को बनाए रखना क़ानून लागू करनेवाली संस्थाओं व इकाइयों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है |

May 23, 2017

हरफनमौला पत्रकार विद्या प्रकाश


- डॉ . मुहम्मद अहमद 
अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हिंदी जगत को ओतप्रोत करनेवाले सुख्यात पत्रकार विद्या प्रकाश अब हमारे बीच नहीं रहे | उनका विगत 13 मई 2017 को देर रात लगभग सवा दो बजे उनके पैतृक नगर जौनपुर [ उत्तर प्रदेश ] में देहांत हो गया | वे 66 वर्ष के थे | मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मछलीशहर के जमुहर गाँव के रहनेवाले श्री श्रीवास्तव जौनपुर के सिपाह में दशकों से रहते थे |वे लीवर कैंसर से पीड़ित थे और इधर कुछ दिनों से चिकुनगुनिया से ग्रसित रहे |
; कान्ति ' साप्ताहिक और मासिक से वे दो दशक से अधिक समय से जुड़े रहे और इस्लाम सहित अन्य विषयों पर लगातार लिखते रहे | उनकी मृत्यु से ' कान्ति ' परिवार को गहरा सदमा लगा है | हमारा परिवार उनके आश्रितों के प्रति गहरी समवेदना प्रकट करता है | विद्या प्रकाश जी अपने पीछे पत्नी गीता श्रीवास्तव [ एडवोकेट ] , बेटे डॉ . अनुराग और बेटी जूही को छोड़ गये हैं |
विद्या प्रकाश का पूरा नाम विद्या प्रकाश श्रीवास्तव है , लेकिन वे सदा ' विद्या प्रकाश ' नाम से लिखते रहे | उन्होंने अपने नाम के साथ कभी जातिसूचक शब्द नहीं लगाया | अपने लंबे पत्रकारिता सफर में उन्होंने दैनिक आज , दैनिक जागरण , दैनिक मान्यवर , तरुण मित्र , दिल्ली न्यूज़ आदि में कार्य किया , लेकिन उनका ' कान्ति ' से जितना लगाव था , उतना किसी संचार माध्यम से नहीं था | सही मायने में ' कान्ति ' में लेखन उनके आत्मिक संतोष का बड़ा ज़रिया था | विद्या प्रकाश जी कहीं भी कार्यरत रहे हों , मगर वे ' कान्ति ' में लिखना नहीं भूलते | प्रायः प्रत्येक सप्ताह उनके लेख हमें मिलते और हम उन्हें प्रकाशित करते | कहानी , लघुकथा , कविता से लेकर रिपोर्ताज तक लिखना उनके लिए बड़ा सहज होता | वास्तव में वे पत्रकारिता के आल राउंडर थे | 
सभी जानते हैं कि ' कान्ति ' इस्लामी पत्रकारिता में दशकों से संलग्न है | अतः हमारे यहाँ लेखादि लिखना कुछ कठिन है , लेकिन हरफनमौला [ आल राउंडर ] विद्या प्रकाश जी ऐसा लिखते कि हमें अधिक संपादन की आवश्यकता नहीं पड़ती थी | वे इस्लामी शिक्षाओं से संबंधित विषयों पर ऐसा प्रभावपूर्ण - तथ्यपरक लिखते कि सब मंत्रमुग्ध हो जाते | ऐसे में कभी मुझ पर ये आरोप भी लगे कि मैं आलेख लिखकर ' विद्या प्रकाश ' नाम [ छद्म नाम ] डाल देता हूँ | विद्या प्रकाश नाम के कोई सज्जन नहीं हैं | वे इस्लाम पर कुशलतापूर्वक लिखने के साथ अन्य विषयों पर अपनी कलम चलाते |
अभी थोड़े समय पहले उन्होंने जो लेख भेजे थे , उनमें एक लेख हिंदी भाषा विषयक था , जिसका शीर्षक है ' हिंदी भाषा में विदेशी भाषाओँ के शब्द ' | इस लेख में उन्होंने हिंदी में आये अरबी शब्दों का विशेषकर उल्लेख किया है | विद्या प्रकाश जी एक गंभीर अध्येता भी थे | उनसे मोबाइल पर अक्सर बात होती |  कम बोलते , लेकिन सधी हुई भाषा बोलते | पिछले दिनों अपने बेटे की शादी की , तो निमंत्रण दिया | मोबाइल पर भी बात की , किन्तु व्यस्तता के चलते मैं शादी - समारोह में शामिल नहीं हो सका | विद्या प्रकाश जी से मेरी एक बार भेंट हुई थी | वह अवसर था जमाअत इस्लामी हिन्द के एक कार्यक्रम का , जिसमें सम्मिलित होने के लिए वे भी आये थे | उस समय वे 'कान्ति ' में न के बराबर लिखते थे | भेंट के दौरान मैंने उनसे लिखने का आग्रह किया , तो उन्होंने लिखने का वादा कर लिया और इस वादे को जीवन पर्यन्त निभाया भी | ऐसे लोग विरले ही मिलते हैं , वह भी आज के ज़माने में | ' कान्ति ' परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक शोकांजलि .... उनके योगदान के प्रति हम कृतज्ञ हैं |