Jul 27, 2013

कर्तव्य


नागरिक को ख़ुद ही परिवार , जाति , रंग , दलवाद , नेतावाद एवं अन्य दबावों के पक्षपातों का सामना करना होगा , जिसके लिए बुद्धि की आध्यात्मिक शिक्षा तथा मन की साधना अपरिहार्य बन जाती है .....  कुछ असंभव नहीं ...
तुझमें चमक फ़लक के सितारों से कम नहीं , बस लगन को परवान चढ़ाने की बात है |
- डॉ . मुहम्मद अहमद 

Jul 24, 2013

साम्प्रदायिकता को हराएं

साम्प्रदायिकता को हराएं 


- डॉ . मुहम्मद अहमद 
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अमेरिका जाकर बहुत साफ़ संकेत दिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनने की स्थिति में नरेंद्र मोदी टॉप लीडर यानी प्रधानमंत्री बनेंगे . दूसरी ओर मन्दिर बनाने का ऐलान मोदी के दाहिने हाथ एवं उ. प्र . के भाजपा प्रभारी अमित शाह ने करके अपने हिंदुत्व के एजेंडे को स्पष्ट कर दिया है . मतलब यह है कि समाज में सांप्रदायिकता का ज़हर घोलनेवाली पार्टियाँ सक्रिय हो उठी हैं . भाजपा में अघोषित सत्ता के केंद्र नरेंद्र मोदी बन गए हैं. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भी उनका लोहा मान चुका है, तो भाजपा के नेता भी उनके सामने नतमस्तक हैं. 
लोकसभा चुनावों को लेकर बनायी गई विभिन्न कमेटियों ने कम से कम यह जता दिया है. भाजपा के इतिहास में पहली बार हुआ है. पूरी पार्टी चुनाव अभियान समिति के अधीन तकनीकी रूप से कर दी गई है. चुनावी तैयारी को लेकर बनायी गई अलग-अलग समितियां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को रिपोर्ट नहीं करेंगी. बल्कि वह नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करेंगी . पार्टी के अंदर यह सोच उभरी है कि एक मजबूत एनडीए भी 2009 में भाजपा को केंद्र में नहीं बिठा पाया. 
एक परिणाम यह आया कि सहयोगियों की कीमत पर भाजपा की सीटें संसद में पहले से भी घट गई. कांग्रेस की खराब होती स्थिति के बावजूद और सहयोगियों के सहयोग के बावजूद भाजपा की सीटें 2004 के मुकाबले 2009 में कम हो गई थी. एलके आडवाणी के मजबूत एनडीए के तर्क को इसी आधार पर संघ ने खत्म किया. 
अब भाजपा की रणनीति है कि जिन राज्यों में भाजपा नहीं है, वहां एक वोट बैंक पहले खड़ा किया जाए. उसके बाद सहयोगी दलों को अपनी शर्तों पर राजी किया जाए. क्योंकि भाजपा को दो राज्यों का अनुभव कड़वा है . मोदी सिर्फ संघ परिवार की ही पसन्द नहीं हैं. उनके हिंदू राष्ट्रवाद की छवि को पसंद इसराईल की यहूदी लॉबी भी कर रही है, तो अमेरिकी इसाई लॉबी भी. उन्हें लगता है कि पश्चिम एशिया और साउथ एशिया की इस्लामी चेतना  का जवाब नरेंद्र मोदी हो सकते हैं. 
मोदी के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो लॉबिंग हो रही है, उसमें ये सारे लोग शामिल हैं. भारत के अंदर भी सक्रिय से लॉबियां मोदी को अलग-अलग तरीके से मदद कर रही हैं. पश्चिम एशिया के कई ब़ड़े मुस्लिम शेख जिनकी कारपोरेट रुचि भारत समेत पश्चिम एशिया में है, वो भी मोदी की मदद कर रहे हैं. इसलिए मोदी अब भाजपा के लिए अब मजबूरी हैं . इस साम्प्रदायिकता का ठोस जवाब  सेकुलर पार्टियों को देना है . 
यही इनकी परीक्षा भी है , जिसमें पास होना ही इनकी अस्ल कामयाबी है . ज़ाहिर है , इस लड़ाई में कांग्रेस को मुख्य भूमिका निभानी है , जिसके हाथ में वर्तमान में केन्द्रीय सत्ता की बागडोर है . यूपीए - 2  अब अस्लन अल्पसंख्यक है ! लगभग एक साल से एसपी , बीएसपी और आरजेडी उसे बाहर से सपोर्ट कर रहे हैं . इन सबके नखरों और दबावों में उसे काम करना पड़ा और पड़ रहा है . अतः देश का आर्थिक विकास  समर्थक  राजनीतिक वर्ग  के अरमानों तक महदूद होकर रह गया है .
 जदयू का  अभी तक कांग्रेस को समर्थन नहीं मिला है , लेकिन कांग्रेस अगर बिहार को स्पेशल पैकेज देती है या आगे देने का वादा करती है , तो कांग्रेस उसे अपने साथ लेकर साम्प्रदायिक राजनीति के फैलाव को रोकते हुए अपनी पोज़ीशन मज़बूत कर सकती है . यूपीए - 2 का गठन ही सांप्रदायिक शक्तियों के ख़िलाफ़ हुआ था , मगर उसके  इस पूरे कार्यकाल में इसने इस दिशा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई . हुआ यह कि बेक़सूर मुस्लिम नवजवानों की अंधाधुंध  गिरफ्तारियों और कुछ फर्ज़ी मुठभेड़ों ने कांग्रेस को यकीनन कलंकित किया. 
धुले [ महाराष्ट्र ]  में अक्तूबर 2008 की साम्प्रदायिक हिंसा में पुलिस ने मुस्लिम समुदाय को ही निशाना बनाया , जबकि प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और है . राजस्थान में साम्प्रदायिक हिंसा का क़हर बार - बार मुसलमानों पर ही टूटता है . वहां तक़रीबन साढ़े चार साल से मुसलसल दंगे हो रहे हैं . अजमेर संभाग  , हाड़ौती , मेवाड़  और जोधपुर संभाग सहित प्रदेश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हो चुके , जिनमें मुसलमानों के जान - माल का सर्वाधिक नुक़सान हुआ है .
  इसी तरह असम में भी कांग्रेस सरकार है , बोडो उग्रवादियों ने लगभग 70 मुसलमानों की हत्याएं कीं और लगभग चार लाख को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया . आज भी बोडो क्षेत्रों में मुसलमान असुरक्षित हैं .
 सेकुलर पार्टी समझी जाने वाली एसपी के सत्ताधीन  उ . प्र . में सौ से अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं , जिनके प्राथमिक शिकार मुसलमान ही रहे हैं . साम्पदायिक शक्तियों का मनोबल बढ़ा है . इस प्रकार हम पाते हैं कि जिनके कंधों पर साम्प्रदायिकता के फैलाव को रोकने की ज़िम्मेदारी थी , वे अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं .  
भाजपा तो साम्प्रदायिकता की जनक है . अन्य घटनाओं व कार्यक्रमों के साथ  लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा और  बाबरी मस्जिद की शहादत एवं 2002 की गुजरात - हिंसा के प्रणेता नमो [ नरेंद्र मोदी ] की हरकतों को कोई कैसे नज़रअंदाज़ कर सकता है ?  वास्तव में साम्प्रदायिकता की ये घटनाएं  बताती हैं कि इस समस्या के निदान हेतु ईमानदारी के साथ अब तक प्रयास नहीं किये गये हैं . इसलिए मतदाताओं को ही इस दिशा में आगे क़दम बढ़ाना होगा . उन्हें इस ज़हर को समाप्त करने के लिए ऐसी उम्मीदवारों और पार्टियों को ही मत देना चाहिए , जो साम्प्रदायिकता के पूरी तरह ख़िलाफ़ हों और इस ज़हर को समूल नष्ट करने का संकल्प रखती हों . 
    

Jul 7, 2013

मार्गदीप

तू मेरा मार्गदीप बन जा 
है तम बहुत संदीप बन जा 
ये झंझावात रहेंगे निस दिन 
जीवन का तू प्रदीप बन जा |

- अहमद ' मोहित '  

Jul 5, 2013

सर्व सम्मान

जाति - धर्म या संप्रदाय का नहीं भेद - व्यवधान यहाँ 
सबका स्वागत , सबका आदर , सबका समसम्मान यहाँ 
राम - रहीम , बुद्ध , ईसा का सुलभ एक - सा ध्यान यहाँ 
भिन्न - भिन्न भव - संस्कृतियों के गुण - गौरव का ज्ञान यहाँ 
नहीं चाहिए बुद्धि वैर की , भला प्रेम उन्माद यहाँ |
                                         - राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त 

वह रूह

मौत और ज़िन्दगी है दुनिया का एक तमाशा , 
फ़रमान कृष्ण का था अर्जुन को बीच रन में,
जिसने हिला दिया था दुनिया को एक पल में ,
अफ़सोस , क्यों नहीं है वह रूह अब वतन में |
- अमर शहीद अशफाक़उल्लाह खां