Aug 24, 2013

भ्रष्टाचार से कंगाल होता हमारा देश

भ्रष्टाचार से कंगाल होता हमारा देश
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड [ NSEL ] में घोटाले की खबर अभी आई ही थी कि कोयला ब्लाक आवंटन से जुड़ी फाइलों के गायब होने का नया मामला सामने आ गया | एन एस ई एल के घोटाले से भी सेंसेक्स टूटा , कमज़ोर रुपये ने इसे और बढ़ावा दिया |सरकार ने दोनों जगह लीपापोती की | इन घोटालेबाजों को गिरफ़्त में लाने के लिए आमादा नहीं दिखी | एन एस ई एल में क़रीब चौदह हज़ार निवेशकों के लगभग 56 00 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं , जिनमें से   5574 . 31 करोड़ रुपये लौटाने की बात चल रही है | राज्यसभा में पिछले दिनों भाजपा सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने इसे नया घोटाला बताते हुए एन एस ई एल पर आरोप लगाया कि उसके एक केन्द्रीय मंत्री के साथ नज़दीकी संबंध हैं | कई निवेशकों ने खाद्य राज्य मंत्री प्रो . के . वी . थामस से मुलाक़ात कर इस संकट को हल करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने की मांग की है | एन एस ई एल ने अपना कारोबार रोक दिया है | इस मसले को हल करने के लिए दूर संचार मंत्री मुरली देवड़ा ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है | दूसरी ओर '' कोलगेट '' पर 20 अगस्त को भाजपा ने दोनों ही सदनों में हंगामा और नारेबाजी की एवं प्रधानमंत्री  डॉ . मनमोहन सिंह से बयान की मांग की |  इससे दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। लोकसभा और राज्यसभा दोनों की ही बैठक चार-चार स्थगनों के बाद आखिरकार पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।  राज्यसभा में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि सीबीआई को दिए जाने वाले दस्तावेजों का पता लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी जाएगी। उत्तेजित विपक्ष को चुप करने के फेर में वे यहां तक कह गए कि अगर इस मामले में वे दोषी पाए जाते हैं तो कोई भी दंड स्वीकारने को तैयार हैं। यह मुद्दा लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उठाया। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने पिछले साल 27 अगस्त को सदन में दिए बयान में कोयला मंत्रालय के फैसलों के लिए पूरी जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में ही आदेश दिया था कि कोई भी सूचना या सरकारी फाइलें और रिकार्ड बिना किसी देरी के संबद्ध व्यक्ति की ओर से सीबीआई को मुहैया कराया जाए और वह संबद्ध व्यक्ति प्रधानमंत्री हैं। भाजपा सदस्यों के ‘शेम शेम’ और ‘प्रधानमंत्री जवाब दो’  के नारों के बीच सुषमा ने कहा कि गायब फाइलों में कोयला ब्लाकों के लिए आवेदन की फाइलें भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये फाइलें इसलिए गायब हो गईं क्योंकि कांग्रेस के कुछ बडे नाम इसमें शामिल थे।
सुषमा स्वराज चाहती थीं कि लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान देने का निर्देश दें।उधर राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर जम कर हंगामा हुआ। हालांकि कोयला मंत्री जायसवाल ने इस बारे में बयान देते हुए कहा कि गायब फाइलों के मुद्दे पर विचार के लिए एक समिति का गठन किया गया है और उसकी दो बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने कहा- मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेरा मंत्रालय सीबीआइ की ओर से मांगे गए दस्तावेजों का पता लगाने और उन्हें मुहैया कराने में कोई कसर बाकी नहीं छोडेगा। जायसवाल के बयान से भाजपा सदस्य संतुष्ट नहीं हुए।  विपक्ष के नेता  अरुण जेटली ने सवाल किया कि क्या गायब फाइलों को लेकर कोयला मंत्रालय ने कोई प्राथमिकी दर्ज कराई है ?हकीकत यह है कि इस मामले की कोई प्राथमिकी नहीं दर्ज करायी गई है|     2006 से 2009 के बीच जब कोयला ब्लाकों का आबंटन हुआ था, तब कोयला मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री के ही पास था। फ़ाइलें जो गायब हैं , वे 1993 से 2004  के बीच की हैं  | इस अवधि में खदान आवंटन के लिए जिन कम्पनियों ने आवेदन किया था , कोयला मंत्री के अनुसार , उनमें से 8 - 10 या इससे अधिक फ़ाइलें गायब को गई हैं | अंग्रेजी अखबार '' मेल टुडे '' ने सीबीआई के सूत्रों ने दावा किया है कि कोयला घोटाले से जुड़ी जो फाइलें गायब हैं, वो कांग्रेस से जुड़े लोगों से संबंधित हैं। इनमें कांग्रेस सांसद विजय दर्डा की कम्पनी की फ़ाइल भी शामिल है | दर्डा ने बांदेर कोल ब्लाक के लिए सिफ़ारिश की थी , जिसे पी एम ओ आफ़िस ने आगे बढ़ाया था | इस अख़बार के मुताबिक़ ,कोयला घोटाले में 11 कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ी फाइलें गुम हो चुकी हैं। इन 11 कंपनियों के निदेशकों के नाम एफआईआर में भी है और सीबीआई सूत्रों की मानें तो ये सभी आवंटन यूपीए सरकार ने किए थे। अगर ये फाइलें नहीं मिलती हैं तो सीबीआई का केस कमजोर पड़ जाएगा। अखबार से बातचीत में सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा ने कहा है कि फाइलों के गायब होने से इस केस की जांच को झटका लगेगा।एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर '' इकोनॉमिक टाइम्स '' को बताया, 'हम इस बात की जांच करने को तैयार हैं कि फाइलें आखिर कैसे गायब हो गईं। ये सभी अहम फाइलें हैं। इनके बिना हम अपनी जांच नहीं पूरी कर पाएंगे।' अधिकारी ने बताया कि सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से सीबीआई को इन फाइल के स्टेट्स के बारे में सूचित नहीं किया है । उल्लेखनीय है कि कोयले पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [ कैग ]  की रिपोर्ट गत वर्ष 17 अगस्त  को पेश रिपोर्ट में कहा गया था कि 142 कोयला ब्लॉकों की प्रतिस्पर्धी तरीके से नीलामी न कराने की वजह से प्राइवेट कंपनियों को एक लाख 85 हजार 591 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ और सरकार को इतने का ही नुकसान हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, मनमानी पूर्ण आवंटन के बजाय इन खदानों की नीलामी की गई होती तो सरकारी खजाने में करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये का ज्यादा राजस्व आता। कैग ने अपनी रिपोर्ट में टाटा स्टील, टाटा पावर, भूषण स्टील, जिंदल स्टील ऐंड पावर, हिंडाल्को और एस्सार ग्रुप समेत 25 कॉर्पोरेट घरानों को फायदा मिलने की बात कही थी | साथ ही कैग द्वारा अनिल अंबानी की कंपनी  रिलायंस पावर को करीब 29,033 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाए जाने की बात भी कही गई थी | मगर इस पर बराबर लीपापोती की गई , यहाँ तक कि फ़ाइलें गुम हो गईं | भ्रष्टाचार हमारे देश की इन्तिहाई संगीन समस्या है | अफ़सोस यह भी जिन प्रभावी और कारगर उपायों की ज़रूरत है , उन पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया जा रहा है | यह समस्या सीधे तौर पर इन्सान की ज़ेहनियत से जुड़ी हुई है | अगर इन्सान के अंदर सही अर्थों में ईशभय पैदा हो जाए और उसमें यह अवधारणा विकसित हो जाए कि अगर भ्रष्टाचार जैसा बुरा कर्म करेगा , तो ईश्वर उसे दंडित करेगा , उसकी पकड़ से कोई नहीं बच सकता , तो वह अवश्य ही भ्रष्टाचार से दूर रहेगा और सुकर्म करके अपने दुनियावी और पारलौकिक जीवन को सफल बनाएगा | ज़रूरत है , इन्सान में इस अवधारणा को भी परवान चढ़ाने की |
- डॉ . मुहम्मद अहमद 

दूकानें ख़ाली होती हैं

अब लूट झपट से हस्ती की , दूकानें ख़ाली होती हैं , 
यहाँ पर्वत - पर्वत हीरें हैं , यहाँ सागर - सागर मोती हैं ,
कुछ लोग हैं जो इस दौलत पर , पर्दे लटकाए फिरते हैं ,
हर पर्वत को हर सागर को , नीलम चढ़ाए फिरते हैं |
  - फैज़ अहमद ' फैज़ '

Aug 20, 2013

क्या इस्लामी बैंकिंग उबारेगी देश को खस्ताहाली से ?

 क्या इस्लामी बैंकिंग उबारेगी देश को खस्ताहाली से ?

मुसलमानों की देश में इस्लामी बैंकिंग शुरू करने की बहुत पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए केन्द्रीय रिज़र्व बैंक ने केरल में इस्लामी तर्ज़ की बैंकिंग शुरू करने को मंज़ूरी दे दी है | रिज़र्व बैंक के नये 23 वें गवर्नर रघुराम राजन व्यक्तिगत रूप से वर्षों से इस्लामी बैंकिंग के पक्ष में रहे हैं | उनका मानना है कि यह बैंकिंग व्यवस्था भारत के लिए बहुत उपयोगी और कल्याणकारी है | इससे देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी | केरल के वाणिज्य मंत्री पी के कुन्हालीकुट्टी  के मुताबिक़ , रिज़र्व बैंक ने यह मंज़ूरी खाड़ी देशों द्वारा भारत की बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं में पूंजी निवेश के प्रति बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए दी है | अब केरल स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन [ KSIDC ] एक ब्याजमुक्त वित्तीय  कम्पनी भी चलाएगी , जिसका नाम केरामन फाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड [ CFSL ] होगा | यह कम्पनी पहले से ही कार्यरत है | इस कम्पनी को अल - बरका फाइनेंशियल सर्विसेज़ की जगह लिया गया है | वाणिज्य मंत्री कुन्हालीकुट्टी और    केरामन फाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड  के चेयरमैन पी मुहम्मद अली ने कोच्ची में पत्रकारों और संवाददाताओं को बताया कि एक हज़ार करोड़ रु . की अधिकृत पूंजी से इसे शुरू किया जायेगा , जिसे बढ़ाकर जल्द ही ढाई हज़ार करोड़ रु . कर दिया जायेगा | इन्होंने बताया कि इस कम्पनी को जल्द खाड़ी देशों से चालीस हज़ार करोड़ रु . मिलने का अनुमान है ,जिससे  हमारी अर्थव्यवस्था यकीनन  सुधरेगी |   CFSL में KSIDC का 11 फ़ीसद हिस्सा होगा , जबकि 8 फ़ीसद हिस्सेदारी व्यक्तिगत शेअरधारकों की होगी | जनाब मुहम्मद अली ने बताया कि  केरामन फाइनेंशियल सर्विसेज़ लिमिटेड को रिज़र्व बैंक , सेबी और वक्फ़ बोर्ड की मंज़ूरी मिल चुकी है | CFSL के इस्लामी शरिआ पर आधारित कई उत्पाद होंगे , जो देश के सभी मुख्य शहरों और खाड़ी देशों में अगले महीने लांच किए जायेंगे | इस कम्पनी के प्रबंध निदेशक  ए पी एम मुहम्मद हनीश के अनुसार , केरामन फंड के बैनर तले निवेश की वैकल्पिक स्कीमें भी शुरू की जाएँगी , जो मुख्य रूप से अभी केरल तक ही सीमित होंगी | ये सभी उत्पाद ब्याजमुक्त होने के साथ ही शराब , जुआ , तम्बाकू आदि समाज विरोधी और हानिकारक कारोबार या  इससे जुडी अन्य चीज़ों से अनिवार्यतः मुक्त होंगे , क्योंकि इस्लाम इनकी अनुमति नहीं देता | रिज़र्व बैंक की मंज़ूरी का देश के कई मुस्लिम संस्थाओं , संगठनों और लब्ध - प्रतिष्ठ जनों ने स्वागत किया है | दुनिया के 75 देशों में इस्लामी बैंकिंग सेवा मौजूद है , जिनमें दस खरब डालर से अधिक का कारोबार हो रहा है | इस सेवा को अपनानेवाला भारत अब 76 वां देश बन चुका है | इसलिए अब माना जा रहा है कि 2015  इस्लामी बैंकिंग का कारोबार बढ़कर 28 खरब डालर हो जाएगा | अदालत में मुक़दमे के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस वर्ष के शुरू में अल - बरका को इस्लामी बैंकिंग शुरू करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया था .  अतः अब नए नाम के साथ  इसे   शुरू करना ही उचित था | प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ब्याजमुक्त बैंककारी के प्रशंसक रहे हैं | अभी कुछ ही समय पहले अपनी मलेशिया यात्रा  के दौरान कहा था कि  '' इस व्यवस्था में मंदी को झेलने की क्षमता है | यह बाज़ार के दबावों को काफ़ी सहन कर सकती है | बैंकिंग के क्षेत्र में समय - समय पर प्रयोग करते रहना ज़रुरी है और मलेशिया की इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली के सामयिक होने के कारण मैं आरबीआई से कहूँगा कि इस दिशा में गंभीरता से सोचे एवं इसका अध्ययन करे कि मलेशिया मौजूदा आर्थिक समस्याओं से कैसे निबट रहा है ? '' बहरहाल अब रिज़र्व बैंक ने यह ऐतिहासिक - सराहनीय क़दम उठा लिया है , जिसका सकारात्मक परिणाम आना  यक़ीनी है | इस क़दम से देश की अर्थव्यस्था को ज़रूर मज़बूती मिलेगी |
 डॉ . मुहम्मद अहमद 

Aug 19, 2013

जातिप्रथा कोई फौलादी ढांचा नहीं

आज लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार  -  उत्कृष्ट निबन्धकार , उपन्यासकार , समालोचक  आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म दिवस है | आपका जन्म 19 अगस्त 1907 में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था। आपकी आप साहित्य सेवा के लिए हिंदी जगत आपका सदैव ऋणी रहेगा | आपका सांस्कृतिक चिन्तन कई अर्थों में क्रांतिकारी था | ये आज भी कितने लाभकारी हैं , इनकी एक मिसाल देखिए --  '' अशोक के फूल '' में ' मेरी जन्मभूमि ' शीर्षक  आलेख में आप लिखते हैं -- 
 '' हमारे गाँव की विविध जातियाँ यह सिद्ध करती हैं कि तथाकथित जातिप्रथा कोई फ़ौलादी ढांचा नहीं है , उसमें अनेक उतार - चढ़ाव होते रहते हैं और होते रहेंगे |  संक्रांति - काल से आप क्या समझते हैं यह तो मुझे नहीं मालूम , पर साहित्यिक का कर्तव्य तो स्पष्ट है कि वे कभी किसी प्रथा को चिरन्तन न समझें , किसी रूढ़ि को दुर्विजेय न मान लें | इतिहास - विधाता का स्पष्ट इंगित इसी ओर है कि मनुष्य में जो  ' मनुष्यता ' है , जो उसे पशु से अलग कर देती है , वही अराध्य है | क्या  साहित्य और क्या राजनीति , सबका एकमात्र लक्ष्य इसी मनुष्यता की सर्वांगीण उन्नति है | '' 
[ पृष्ठ 38 ] 
इस महान साहित्य- पुरुष को मेरा कोटिशः आदाब ,अभिवादन ......   

- डॉ . मुहम्मद अहमद 

Aug 18, 2013

नित राह नई बनाते हैं

जिनको मिला इक्तिदार वो क्या साहबे नज़र थे ?


हम तो ठहरे दरया , नित राह नई बनाते हैं |

- अहमद ' मोहित '

संघर्ष


ले के जाए जहाँ भी मेरी मजबूरी ,
हम आँखों में खाब न कोई रखते हैं |
- अहमद ' मोहित '

Aug 14, 2013

अमन बहाल कीजिए

 हिंसा का अंत बुरा 
- डॉ . मुहम्मद अहमद 
लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र बिहार में भाजपा की सांप्रदायिक ध्रवीकरण की घिनौनी कोशिश  और साज़िश चल रही है . नीतीश सरकार द्वारा दुत्कारे जाने के बाद बिहार में सांप्रदायिक हिंसा व तनाव  की दो दर्जन से अधिक वारदातें हो चुकी हैं , जो कि पिछले कई वर्षों में घटित वारदातों की लगभग छह गुना हैं . कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह का कहना है कि '' मैंने पहले ही कहा था कि भाजपा गैर भाजपा शासित राज्यों को निशाना बनाएगी . '' उनके मुताबिक़ , दो महीने में बिहार में छह सांप्रदायिक वारदातें हो चुकी हैं .  दक्षिण बिहार का नवादा सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा है . बेतिया [उत्तर बिहार ] , अररिया [ पूर्व बिहार ] और बगहा  में सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है . मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों और राजनीतिक दलों से शांति बनाए रखने और अफ़वाहों पर ध्यान न देने की अपील की है . उन्होंने राज्य में असहनशीलता और असहिष्णुता का माहौल पैदा करने की कुचेष्टा की निंदा की है . 
'' हिन्दुस्तान टाइम्स '' [ 11 अगस्त 2013 ] में प्रकाशित वर्गीज़ के जार्ज की रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि बिहार में गत जुलाई माह में सांप्रदायिक झड़पों के 16 केस दर्ज किए गए , जबकि पिछले कुछ वर्षों में यह औसत दो से चार का था . जून 2013 के मध्य में जदयू और भाजपा में अलगाव हुआ था .  सांप्रदायिकता का ऐसा ख़ूनी खेल खेला गया है कि नवादा हिंसा की चपेट में होने के सबब अनिश्चितकालीन कर्फ्यू की चपेट में है . चपेट इसलिए कि कर्फ्यू भी एक त्रासदी है , एक बड़ी समस्या है आम जन के साथ ही ख़ास जन के लिए भी . 1992 में मुलायम सिंह यादव ने वाराणसी में छह हफ़्ते का कर्फ्यू लगाया था , जो परेशानी के साथ ही सकारात्मक परिणाम दे गया और आर्थिक नुक़सान की वजह से संघातिक दंगे नहीं हुए . क्या नवादा में भी यह परिणाम आएगा ? यकीनी तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता .
 लगता है कि नवादा में हिंसा पूर्व नियोजित थी , अन्यथा होटल में खाने - पीने का मामूली - सा विवाद इतना उग्र रूप न इख़्तियार करता . फिर अफ़वाहों का बाज़ार गर्म कर दिया गया और हिंसक वारदातों में तेज़ी आती गई . जन - जीवन ठप और अस्त - व्यस्त है . ये पंक्तियाँ लिखने तक 10 अगस्त से जारी हिंसा का उफान थम नहीं सका है . दंगाईयों पर रोक नहीं लग पा रही है . उल्लेखनीय है कि मामूली विवाद के बाद स्थिति शांतिपूर्ण हो गई थी , मगर शंतिविरोधियों को यह रास न आया .पुलिस पर हमला कर दिया और हालात बिगड़ गए.   10 अगस्त को ही दो पक्षों के बीच हुए टकराव के बाद पुलिस फायरिंग हुई , जिसमें घायल हुए गढ़पर मोहल्ला के कुंदन रजक की मौत हो गई थी . फ़ायरिंग के आरोप में एएसआई को निलम्बित कर दिया गया है . 12 अगस्त को लग रहा था कि स्थिति सामान्य हो जाएगी . बाजार छिटपुट खुल भी रहे थे , लेकिन असमाजिक तत्वों को शांति रास नहीं आई . 11 अगस्त की रात पार नवादा के कई मोहल्ले में हमले का शोर शराबा हुआ , जिसका असर दूसरे हिस्सों में भी पड़ा . भोर होने के पूर्व ही पार नवादा के चमर टोली मोहल्ले में एक घर पर बम विस्फोट किया गया . इसके बाद जगह-जगह मारपीट की वारदात हुई . मुसलमानों की जायदादों का बेहद नुक़सान हुआ है .
 हालात तेजी से बिगड़ते गये . दोपहर बाद तो पार नवादा इलाके में गोलीबारी व बम विस्फोट के सारे रिकार्ड ध्वस्त हो गये . पार नवादा की आंच मुख्य शहर की ओर भी आयी. जमकर उपद्रव हुआ . कई दुकानों को लूटा व फूंका गया. शहर का हर हिस्सा किसी न किसी रूप में हिंसा की ज़द में आ गया था। तब अधिकारियों को कड़ा रूख इख्तियार करना पड़ा . फायरिंग की गई . आंसू गैस के गोले छोड़े गये .  अंतत: शहर में बेमियादी कर्फ्यू लागू कर दिया गया . जैसा हर दंगे में होता है , अफ़वाहों पर काबू न पाने से स्थिति बिगड़ती जाती है . नवादा में भी यही हुआ . 
12 अगस्त को बुंदेलखंड सहायक थाना क्षेत्र के पार नवादा में दोपहर बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने अफवाह फैला दी कि नवादा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के साथ मारपीट की जा रही है . इस खबर के बाद गया रोड व रजौली रोड से गुजर रहे एक वर्ग के लोगों के साथ दंगाई तत्वों द्वारा मारपीट की जाने लगी . इस दौरान झारखंड के झुमरी तिलैया से जमुई जा रहे बाइक सवार व उसके साले को अंसारनगर में रोककर बेरहमी से पीटा गया . उसकी बाइक को फूंक दिया गया . दोनों युवक भागकर बुंदेलखंड थाने पहुंचे . इसके पूर्व गया रोड में चर्च के समीप भदौनी के एक युवक की हाकी स्टिक और राड से पिटाई की गई . इस दौरान अंसार नगर व मोगलाखाड़ मोहल्ले में जमकर गोलीबारी व बम विस्फोट भी किया गया . गोलीबारी में मोगलाखाड़ और बुंदेलखंड के एक-एक युवक घायल हुए , जिनमें से एक की मौत होने की खबर है , हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है .
 ड्यूटी पर तैनात जवानों को भोजन पहुंचाने पहुंचे पुलिस मेंस एसोसिएशन के सचिव अमरेंद्र सिंह सहित अन्य जवानों पर अंसार नगर में पथराव किया गया , जिसमें सचिव सहित जवान एंथोनी बाबला को गंभीर चोटें आईं . पुलिस की टाटा सूमो गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। जख्मी जवान व अन्य लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में दाखिल कराया गया है . पार नवादा में हमले की खबर के बाद मुख्य शहर के लोग भी आक्रमक हो गए और अस्पताल रोड, विजय बाजार तथा पुरानी कचहरी रोड की कई दुकानों में आग लगा दी. उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हवा में पांच-छह चक्र गोलियां चलाई और आंसू गैस के गोले छोड़े .इसके पूर्व सुबह 4 बजे करीब गया रोड स्थित मोहल्ले में बम फोड़ा गया। बाद में पहुंची पुलिस ने दो जिंदा बम बरामद किया . उधर राजमार्ग 31 पर फरहा के समीप कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गये . उत्पातियों ने विजय बाजार, पुरानी कचहरी रोड व अस्पताल रोड में कई दुकानों को फूंक दिया . शहर की स्थिति पूरी तरह से विस्फोटक बनी हुई है . सरकार के साथ दोनों पक्षों को चाहिए कि स्थिति सामान्य बनाने के लिए आगे आएं . हिंसा-उत्पात में किसी का भला नहीं है .