Jul 11, 2014

बलरामपुर में मनरेगा भ्रष्टाचार के नित नये मामले

फारेस्ट गार्ड और वाचर ने फर्ज़ी दस्तखत बनाकर हड़पी लाखों रु. मज़दूरी , अब मज़दूरों को जेल भेजवाने धमकी दे रहे !
 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना [मनरेगा] के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले में सबसे अधिक भ्रष्टाचार हुआ है | उल्लेखनीय है कि इस ज़िला समेत प्रदेश के सात जिलों में भ्रष्टाचार की तहकीकात केंद्रीय जांच ब्यूरो [ सीबीआई ] द्वारा जारी है | सीबीआई को अब तक इन जिलों में मनरेगा में पिछले सालों में घपलों व घोटालों की जांच में बहुत - सी अनियमितताएं मिली हैं , जिनके सिलसिले में मामले दर्ज किये जा रहे हैं |
बलरामपुर के हर्रय्या थानान्तर्गत सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के बनकटवा रेंज सीमा में मनरेगा के तहत वृक्षारोपण और झाड़ी की सफ़ाई के काम कराये गये थे | मज़दूरों से दो - ढाई महीने तक काम कराये गये , लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी लगभग बीस मज़दूरों को मज़दूरी का भुगतान नहीं किया गया है | 
आरोप है कि फारेस्ट गार्ड नुरुल हुदा और टेंगनवार  चौकी के वाचर सिया राम ने मज़दूरों से काम करवाया और उनके फर्ज़ी दस्तख़त बनाकर पैसे हड़प लिए हैं | जब लोग फारेस्ट गार्ड से पैसे मांगने जाते हैं , तो टालमटोल का रवैया अपनाया जाता है | यह भी धमकी देते हैं कि अगर नहीं दिया तो क्या कर लोगे | यह धमकी देते हैं कि बार - बार मांगने आओगे , तो जेल भेजवा दूंगा | 
जिन मज़दूरों ने काम किया और जिनका पैसा फर्ज़ी दस्तखत बनाकर हड़प लिया गया , उनमें से कुछ के नाम और अन्य विवरण इस प्रकार हैं - 1. केशव राम पुत्र राम धीरज [ ग्राम - मैनडीह ] ने 70 दिन काम किये , जबकि इसी गाँव के राम वृक्ष पुत्र पटरे ने 60 दिन | टेंगनवार गाँव के शंभू यादव पुत्र राम धीरज ने 40 दिन काम किया | इसी गाँव के खेदू यादव पुत्र ननकऊ यादव ने 50 दिन काम किया | 
टेंगनवार के ही कृपा राम यादव पुत्र खेदू यादव ने 40 दिन , शिव वचन यादव पुत्र श्याम नारायण यादव ने 40 दिन , मझिले यादव पुत्र कल्लू ने 39 दिन , राम प्यारे यादव ने 30 दिन , राम बहादुर यादव पुत्र राम यश यादव ने 25 दिन , संतोष कुमार यादव पुत्र जग नारायण यादव ने 22 दिन और बडकऊ यादव पुत्र भगवती यादव ने 20 दिन काम किया | 
इन सभी ने इस वर्ष 13 जनवरी से 26 मार्च के बीच विभिन्न अवधियों में काम किये , लेकिन कई माह बीत जाने पर भी इनकी मज़दूरी नहीं मिल पाई है | उच्चाधिकारियों को चाहिए कि वे उक्त मज़दूरों को उनकी मज़दूरी का तत्काल भुगतान कराएं और भ्रष्ट कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करें | मैनडीह के केशव राम ने बताया कि मज़दूरी भुगतान की मांग को लेकर हम लोग जल्द ही जिलाधिकारी , सीबीआई , उच्चाधिकारियों एवं राजनेताओं के पास लिखित शिकायत भेजेंगे | 
मनरेगा में भ्रष्टाचार कोई ढकी - छिपी बात नहीं रही है, लेकिन भ्रष्टाचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में ज़रूर ढिलाई बरती गयी | पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने उत्तर प्रदेश मनरेगा में घोटालों की जांच के लिए दो पत्र पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और तीन बार मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर सीबीआई जांच का आग्रह किया था। 
विभिन्न जिलों में कराई गई जांचों का हवाला देकर इसके लिए खत भी लिखे थे। इन पत्रों के साथ सबूत के तौर पर राष्ट्रीय स्तर के मॉनीटरों की रिपोर्ट भी संलग्न की गई थी। कुछ जिलों का मंत्री ने खुद दौरा कर वहां की रिपोर्ट राज्य सरकार के पास भेजी थी , लेकिन समय पर उचित कार्रवाई नहीं की जा सकी |
बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संतकबीर नगर, मिर्जापुर व कुशीनगर में मनरेगा की हालत सबसे अधिक दयनीय रही है | इसके अलावा अन्य 22 रिपोर्ट की एक और सूची सौंपी गई थी, जहां मनरेगा में भ्रष्टाचार व्याप्त था। तकरीबन दो दर्जन जिलों में कराई गई जांच रिपोर्ट के साथ वहां तैनात आला अफसर भी जांच के दायरे में शामिल हैं | इन जिलों में चंदौली, बलिया, बुलंदशहर, बहराइच, गोरखपुर, सिद्धार्थ नगर, चित्रकूट, महामायानगर, देवरिया, झांसी, कानपुर, अंबेडकर नगर, शाहजहांपुर, जालौन और इलाहाबाद प्रमुख हैं।
ऐसा कहा जा रहा है कि सीबीआई जांच की आंच मुख्यमंत्री सचिवालय के शीर्ष अफसरों तक जाएगी | आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों में मनरेगा के तहत उत्तर प्रदेश में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। फौरी तौर पर हुई जांच में मनरेगा के तहत 25 से 30 फीसद तक की लूट का अंदेशा है।   [ ' कान्ति ' प्रतिनिधि द्वारा ]