Oct 26, 2014

इस मुहिम को कामयाब बनाएं

इस मुहिम को कामयाब बनाएं 
स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ वातावरण बनाने का आह्वान किया था | लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया | नतीजतन पूरे देश में सांप्रदायिकता की बाढ़ आ गयी है | सहज रूप से देश - समाज हितैषी लोग चिंतित हैं | वे चाह रहे हैं कि यह विषम स्थिति जितनी जल्दी बदल जाए और देश में सांप्रदायिक सौहार्द व भाईचारे की खुशगवार फजा बने , उतना ही देशवासियों के लिए अच्छा है | ऐसी ही सदिच्छा रखनेवाले कुछ लोग पिछले दिनों लखनऊ में जुटे |  देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और कौरपोरेट लूट के खिलाफ विभिन्न राजनीतिक दलों व जन संगठनों की बैठक विधानसभा मार्ग लखनऊ स्थित माकपा कार्यालय पर हुई। बैठक में माकपा, भाकपा माले, भाकपा, आईपीएफ, नागरिक परिषद और रिहाई मंच के नेताओं ने आने वाले दिनों में इस जहरीले वातावरण के खिलाफ जन अभियान’ चलाने का फैसला किया | 
इस आयोजन में कई नामचीन नेताओं ने कहा कि कभी ‘लव जिहाद’ के नाम पर अफवाह फैलाकर, तो कभी लाउड स्पीकर जैसे छोटे-छोटे मुद्दों का सांप्रदायिकरण करके संघ परिवार और उससे जुड़े संगठनों ने पिछले चार महीनों में पूरे देश में अराजकता और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। इनमें संघ परिवार और भाजपा नेताओं की भूमिका कई बार खुले तौर पर उजागर भी हो चुकी है , लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है | उन्हें शासन-प्रशासन के स्तर पर खुली छूट और संरक्षण प्राप्त हैं ! 
इन नेताओं ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की भी नुक्ताचीनी करते हुए कहा कि देशी-विदेशी बड़े पूंजीपतियों और काॅरपोरेट निगमों के मफ़ाद व हित में श्रम कानूनों में बदलाव की जो कोशिश की जा रही है , वह निंदनीय एवं भर्त्सनीय है | इनके द्वारा बड़े पैमाने पर श्रमिकों का शोषण किया जा रहा है | आज अजीब सूरतेहाल है | देश के संसाधनों और प्राकृतिक खनिजों की लूट के लिए आमंत्रित कर देश को तबाह करने वाली आर्थिक नीतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है ! हाइब्रिड बीजों और रासायनिक खादों व अन्य रसायनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर पहले से ही खेती - किसानी को चौपट कर रखा गया है , अब दवाओं का कारोबार भी इन्हीं धन्नासेठों के हवाले कर दिया गया है , जिसके कारण जीवन रक्षक दवाइयों की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं , यहां तक की कैंसर की जो ग्लेवेक नामक दवा साढ़ें आठ हजार की थी , उसकी कीमत अब मोदी के अमेरिका दौरे के बाद एक लाख आठ हजार हो गई है। इन नेताओं ने संकल्प लिया कि इस परिस्थिति के ख़िलाफ़ सघन अभियान चलाया जायेगा |
- डॉ . मुहम्मद अहमद