Jun 25, 2016

"कल्पान्त " का बौद्धिकरस

"कल्पान्त " का बौद्धिकरस
डॉ .राम प्रसाद मिश्र की रचनाओं में गजब की बौद्धिकता पाई जाती है ."कल्पान्त " तो बौद्धिक रस से सराबोर है ,जैसा कि उनका "मुहम्मद " खंड काव्य है.वैसे उनके ये दोनों ग्रन्थ वास्तविक और यथार्थवादी शैली के जीवंत उदाहरण हैं ."कल्पान्त" भी ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि रखता है और "मुहम्मद" भी ."कल्पान्त" महाकाव्य है ,जो महाभारत पर आधारित है , जिसमें शांतनु से जनमेजय तक का प्रक्षेप रहित वर्णन कलात्मक ढंग से कसावट और प्रवाह के साथ प्रस्तुत किया गया है ,जिसमें अतिरंजन से परे रहने के प्रयास के साथ यादवों का गृह युद्ध और विनाश समाविष्ट है .महाभारत में पात्रों कि बहुत बड़ी संख्या है , मिश्रजी उनको अपनी विशिष्ट काव्यमयी पंक्तियों में जीवंत कर दिया है .महाभारत युद्ध का पर्याय है . मिश्रजी कहते हैं कि यह युद्ध अवांछित और उद्देश्यहीन नहीं है ,अपितु उनके शब्दों में -------
रुद्ध अधिकार हो तो क्रुद्ध होकर प्रखर
युद्ध करे पुरुष यही उसका पुरुषार्थ है
इसी से काम ,अर्थ ,धर्म क़ी रक्षा होती
इसी से मोक्ष का खुल जाता द्वार है
मिश्रजी कहते हैं कि युद्ध परम धर्म बन जाता है ,किन्तु कब ? कवि के शब्दों में-------
अन्याय के विरुद्ध युद्ध परम धर्म है
युद्ध परम निर्णायक तत्त्व है सत्त्व है
सभ्यता-संस्कृति के विकास का नियामक है -
मानवता युद्ध के डगोंसे आगे बढती
नाश -निर्माण पूर्णतः अन्योन्याश्रित हैं
महाभारत इस शाश्वत सत्य का आख्याता
और व्याख्याता है ,अतयव,चिरंतन .
' पुरुषोत्तम ' (38 सर्ग), ' दृष्‍ट‌ि ' ( 22 सर्ग), ' कल्पांत ' ( 15 सर्ग), ' मुहम्मद ' ( 7 सर्ग), ' स्वर्गता ' ( 7 सर्ग), ' सार्वभौम ' ( संग्रह) इत्यादि के कवि; ' हिंदी साहित्य का वस्तुपरक इतिहास ', ' तुलसी-सर्वेक्षण ', ' विश्‍वकवि होमर और उनके काव्य ', ' प्रसाद : आलोचनात्मक सर्वेक्षण ' इत्यादि के आलोचक; ' कुछ खोता कुछ पाता गाँव ' ( आंचलिक) ,' ' बीसवीं सदी ' इत्यादि के उपन्यासकार; ' विश्‍व के सर्वश्रेष्‍ठ महाकाव्य ', ' दलित साहित्य ' इत्यादि के निबंधकार डॉ. रामप्रसाद मिश्र ने व्यंग्य, बाल साहित्य, संस्मरण, आत्मकथा, जीवनी, दैनंदिनी, धर्म, राजनीति इत्यादि विधाओं में स्फीत और मौलिक सर्जन किया है । हिंदू धर्म, हिंदी साहित्येतिहास और भारतीय संस्कृति पर उन्होंने चार ग्रंथों की रचना की है । उन्हें उ. प्र. हिंदी संस्थान, लखनऊ का ' साहित्यभूषण पुरस्कार ', हिंदी अकादमी, दिल्ली का ' बाल साहित्य पुरस्कार ', ' कुंती गोयल इंटरनेशनल अवार्ड ' ( जोधपुर), ' मानस संगम साहित्य पुरस्कार ' ( कानपुर) इत्यादि तथा बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना का ' साहित्य-तपस्वी ' आदि अनेक सम्मान प्राप्‍त हो चुके हैं ।

Jun 18, 2016

इस स्वागत योग्य ऐलान पर फ़ौरी अमल की ज़रूरत

इस स्वागत योग्य ऐलान पर
फ़ौरी अमल की ज़रूरत

मोदी सरकार का मुसलमानों के हितार्थ यह ऐलान स्वागत योग्य है कि बेक़सूर मुसलमानों की गिरफ़्तारी पर रोक लगाई जाएगी | केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने अलीगढ़ में कहा कि मुसलमानों पर आतंकी होने के झूठे आरोप लगाना और बाद में सबूत न मिलने के अभाव में उन्हें छोड़ देना चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून में सुधार किया जाएगा। लॉ कमिशन इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया में बदलाव लाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके साथ ही कई कानून विशेषज्ञ भी रिपोर्ट को बनाने में मदद कर रहे हैं। सरकार के दो साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री गौड़ा ने कहा कि आतंक के झूठे आरोपों के आधार पर मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार करना चिंता का विषय है। पिछले कई वर्षों से ऐसे मामले बार - बार सामने आते रहे हैं कि बेक़सूर मुसलमानों को जेल में डाल दिया जाता है और सामान्यतः लंबे समय के बाद अदालत उन्हें बेक़सूर बताते हुए रिहा कर देती है
यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का ' प्रिय खेल ' बना हुआ है | दिल्ली में मुहम्मद आमिर खान को 18 वर्ष की उम्र में गिरफ्तारी की गई थी और 14 वर्ष बाद जब वह 32 वर्ष का हुआ , तो उसे बेक़सूर क़रार देते हुए जेल से रिहा किया गया | इसी तरह उत्तर प्रदेश में लखनऊ से इकबाल को 2008 में पकड़ा गया और आठ साल बाद बेक़सूर मानते हुए रिहा कर दिया गया | बेगुनाही के ये दो ही नहीं , दर्जनों मामले हैं , लेकिन यह बड़े अफ़सोस और चिंता की बात है कि नाजायज़ गिरफ्तारी के लिए किसी को भी कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया , जबकि मुसलमानों की ओर से इसकी सरकार से बार - बार मांग की जाती रही है |
कुछ समय पहले 'ख़ुफ़िया एजेंसियों की साम्प्रदायिकता और आतंकवाद' विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में में भूतपूर्व पुलिस अधिकारी एस.आर.दारापुरी ने खुलासा किया कि आई.बी. हो या ए.टी.एस., एस.टी.एफ. और स्पेशल ब्रांच सभी का तरीका यही है कि स्क्रिप्ट पहले लिखी जाती है और बाद में लोगों को उठाकर उसमें फिट कर दिया जाता है | यू.पी. प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संभ्रांत लोगों और आतंकवाद के नाम पर होने वाली गिरफ्तारियों के प्रभावितों ने हिस्सा लिया | प्रभावित लोगों ने अपनी आपबीती बयान की तो दूसरी तरफ वक्ताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियां सांप्रदायिक मानसिकता और भेदभाव की वजह से बेगुनाह मुस्लिम नवजवानों को गिरफ्तार करती हैं |
ए.टी.एस., एस.टी.एफ. के जवान महीनों तक पूछताछ के नाम पर घरवालों को परेशान करते हैं और फिर मौक़ा मिलते ही अपहरण के अंदाज़ में किसी को उठा लेते हैं | बाद में उन लोगों पर कई मामले दर्ज कर दिए जाते हैं , ताकि पूरी ज़िंदगी उनको ज़मानत न मिल सके | एक तीर से कई शिकार किये जा रहे हैं , जिसमें 'आउट ऑफ़ टर्न' प्रमोशन पाने के लिए 'गुड वर्क' की उपाधि प्राप्त करने और वाहवाही लूटने का घिनौना खेल भी शामिल है | इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि मीडिया पुलिस और एजेंसियों के बयान को अपनी सतह पर जांच किये बगैर प्रकाशित और प्रसारित कर देता है | उन्होंने इस रवैये को 'मीडिया का मोतियाबिंद' का नाम दिया |

अवकाशप्राप्त पुलिस अधिकारी एस.एम.नसीम ने आरोप लगाया कि एस.टी.एफ.,
ए.टी.एस. और अन्य खुफिया एजेंसियों के लोग गैर कानूनी तौर से वसूली में संलिप्त हैं और रकम न मिलने पर लोगों को फंसा रहे हैं | उन्होंने बताया कि एक अस्पताल में लिंग की जांच के नाम पर वसूली करते उन्होंने खुद पकड़ा | एस.एम. नसीम ने कहा कि मुसलमानों की हमदर्द माने जाने वाले सरकारों में बेक़सूरों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है | किसी भी ऐरे गैरे को मास्टरमाइंड बताकर गिरफ्तार कर लिया जाता है और ज्यादा से ज्यादा केस उसके सर मढ़ दिये जाते हैं | यह सिलसिला बंद होना चाहिए | मंत्री महोदय के ऐलान को फ़ौरी तौर पर अमली जामा पहनाने की जरूरत है