Sep 4, 2016

अल्पसंख्यक कल्याण के मोर्चे पर अखिलेश सरकार नाकाम

अल्पसंख्यक कल्याण के मोर्चे पर अखिलेश सरकार नाकाम 
ऐसी ख़बरें प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में आ रही हैं कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव दस मुस्लिम पार्टियों के नवगठित गठबंधन ' इत्तिहाद फ्रंट ' को रिझाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं | 2017 के  विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सपा की इस कोशिश को कितनी कामयाबी मिलेगी , अभी कुछ कहना मुश्किल है | यह सभी को पता है कि सपा ने मुसलमानों के हितार्थ कुछ नहीं किया है | अब से लगभग साढ़े चार वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश में जब सपा सरकार आई थी  तब मुसलमानो से अनेकानेक वादे किये गए थे|अखिलेश सरकार ने मुसलमानों के कल्याण लिए जो वादे किए थे और जिन योजनाओं की घोषणा की, उनमें से किसी पर भी सुचारुरूप से पहल नहीं की और न ही गंभीरता के साथ अमल किया गया |  गंभीरता की स्थिति यह है कि अखिलेश सरकार ने जिन अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं को लागू करने का फ़ैसला मंत्रिमंडल  की 14 अगस्त 2013 को हुई बैठक में लिया गया था , उसके क्रियान्वयन की समीक्षा - बैठक होती है लगभग तीन वर्ष बाद 11 मई 2016 को ! इस बैठक को ही मात्र आधा घंटे में निबटा दिया गया !! इसे क्या कहेंगे ? सच्चर कमेटी और रंगनाथ कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की जरूरत पर बार - बार बल देनेवाली सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद तय किया गया था कि अल्पसंख्यक-कल्याण की घोषित योजनाओं के कार्यान्वयन की प्रगति रिपोर्ट प्रत्येक महीने की 12 तारीख को सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा | मगर ऐसा नहीं हो सका | मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने अल्पसंख्यकों के ‘सर्वांगीण’ विकास के लिए 30 सरकारी विभागों की 85 योजनाओं के जरिए लाभान्वित करने का फैसला किया था | इन योजनाओं को लागू करने और उस पर निगरानी के लिए प्रदेश में मुख्य सचिव और जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियां गठित करने का फैसला भी किया गया था | इन समितियों में अल्पसंख्यक समुदाय के दो-दो सदस्यों को नामित करने का प्रावधान भी किया गया था | प्रस्तावित योजना में पारदर्शिता बरतने के लिए हिंदी और उर्दू में वेबसाइट शुरू करने और धूमधाम से इसका प्रचार करने का निर्णय किया गया था | धूमधाम से प्रचार तो खूब हुआ और उस पर करोड़ों रुपये फूंक डाले गए. लेकिन मुसलमानों के कल्याण का कोई काम सिरे से नहीं हुआ | अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने क्या किया, इस सवाल का मुख्यमंत्री सचिवालय के पास भी कोई जवाब नहीं था. आरटीआई ऐक्टिविस्ट सलीम बेग ने सूचना के अधिकार के तहत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस बारे में सूचना मांगी थी , लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय उन सवालों का जवाब नहीं दे पाया |  मुख्यमंत्री सचिवालय ने उन सवालों को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कंधे पर डाल दिया. लिखा कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ही इन सवालों का जवाब देने में सक्षम है | उधर सवाल देख कर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के हाथ - पैर फूल गए | उसके पास भी जवाब नहीं था | लंबे अर्से तक फाइल वहीं दबी रही. जवाब हासिल करने के लिए जब दूसरी अपील दाखिल हुई और कानूनी घेरा बढ़ा , तब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने कुछ जवाब जुटाया , जो आंकड़ों का खेल मात्र है | कहा जाता है कि अखिलेश सरकार की इस नाकामी पर मुलायम सिंह यादव खासे नाराज़ हैं , जो दिखावा भी हो सकता है | उत्तर प्रदेश में उर्दू , अरबी और फारसी भाषाओं के उन्नयन की ओर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है | बताया जाता है कि अल्पसंख्यक विभाग की इस्लामिक शोध से जुड़ी संस्था की जमीन और इमारत आजम खान की निजी संस्था को कौड़ियों के मोल लीज पर दे दी गई , दूसरी ओर लखनऊ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय भी उपेक्षा का शिकार है | उत्तर प्रदेश में दूसरी राजभाषा के रूप में स्थापित उर्दू को विकसित करने के उद्देश्य से लखनऊ में उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, लेकिन यहां उन्हीं भाषाओं की प्राथमिकता समाप्त कर दी गई | अजीबोगरीब पहलू यह है कि उर्दू अरबी और फारसी के अकादमिक विकास के लिए जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, उसके सभी शीर्ष पदों पर बैठे लोग उर्दू अरबी या फारसी भाषाओं की शैक्षिक योग्यता नहीं रखते | जामिया मिलिया के प्रोफेसर खान मसऊद अहमद ने 2014 में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी-फारसी विश्वविद्यालय का कुलपति बनते ही उर्दू भाषा की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी ! अखिलेश सरकार के चार साल पूरे होने पर सामाजिक संस्था रिहाई मंच ने सपा सरकार के समक्ष 41 सवाल रखे थे | सरकार की तरफ से अब तक उन सवालों का कोई जवाब सामने नहीं आया है | ये सवाल इस प्रकार हैं - 1. निर्दोष मुस्लिम नवजवान जोआतंकवादी होने के नाम पर जेलों में बंद हैं, उन्हें चुनावी वादे के अनुसार रिहा क्यो नहीं किया गया? 2. अदालतों द्वारा बरी हुए बेगुनाहों को चुनावी वादे के अनुसार पुनर्वास और मुआवज़ा क्यों नहीं दिया गया?3. साम्प्रदायिक हिंसा के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?4. मुसलमानों को 18 फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया?5. यूपी में साम्प्रदायिक हिंसा बिल लाने के लिए सरकार ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई? 6. सच्चर, रंगनाथ और कुंडू कमेटी की सिफ़ारिशों पर अमल क्यों नहीं किया गया ? 7. मुज़फ्फ़रनगर सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ित परिवारों को इंसाफ़ दिलाने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया?8. साम्प्रदायिक उन्माद और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ़ सरकार ने कानूनी कारवाई क्यों नहीं की?9. राजनीतिक विरोधियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ भड़काऊ भाषण देकर अराजकता फैलाने वाले नेताओं पर कानून के मुताबिक़ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?10. प्रदेश के राज्य अल्पसंख्यक आयोग में वार्षिक रिपोर्ट तैयार नहीं होती, मामलों का कोई केस स्टडी नहीं होता. साम्प्रदायिक हिंसा से ग्रस्त मुज़फ्फ़रनगर, दादरी तक में आयोग ने कोई दौरा नहीं. इसकी स्थापना के गाइडलाइन के अनुसार जनपदों में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पदों पर तैनात अधिकारी अल्पसंख्यक नहीं हैं. सरकार की इस उदासीनता की वजह क्या है?11. प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के क्रम संख्या 14 व 15 में उल्लिखित है कि जो भी नवजवान दहशतगर्दी के तहत जेलों में बंद किए जाएंगे और अदालती प्रक्रिया से बरी होंगे, उन्हें पुनर्वास, मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दी जाएगी. परन्तु इस पर अमल क्यों नहीं किया गया? 12. प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम के मुताबिक़ , आतंकवाद के नाम पर जेलों में बंद किए गए नौजवानों को फर्जी तरीके से फंसाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई उन्हीं धाराओं के तहत किए जाने की बात के बावजूद ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? 13. मुसलमानों के अंदर आत्मविश्वास पैदा करने के लिए राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती का विशेष प्रावधान करने और कैम्प आयोजित करने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया? 14. सभी सरकारी कमीशनों, बोर्डों और कमेटियों में कम से कम एक अल्पसंख्यक प्रतिनिधि को सदस्य नियुक्त करने के सरकार के वादे का क्या हुआ? 15. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 से अखिलेश सरकार ने 3 दिसंबर 2015 को सूचना अधिकार नियमावली 2015 से उर्दू भाषा में आवेदन/अपील देने पर पाबंदी क्यों लगाई? 16. बुनकरों की क़र्ज़ माफी क्यों नहीं हुई? 17. किसानों की तरह गरीब बुनकरों को मुफ्त बिजली देने के वादे का क्या हुआ?18. जिन औद्योगिक क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों की बहुलता है, जैसे हथकरघा, हस्तकला, हैंडलूम, कालीन उद्योग, चूड़ी, ताला, जरी, जरदोजी, बीड़ी, कैंची उद्योग उन्हें राज्य द्वारा सहायता देकर प्रोत्साहित करने, करघों पर बिजली के बकाया बिलों पर लगने वाले दंड और ब्याज को माफ़ कर बुनकरों को राहत देने, छोटे और कुटीर उद्योगों में कुशल कारीगरों की कमी को पूरा करने के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर एक-एक आईटीआई की स्थापना करने का वादा पूरा क्यों नहीं हुआ?19. प्रदेश के अल्पसंख्यक बहुल जिलों में संचालित मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्लान के तहत संचालित अधिकांश योजनाएं अपूर्ण क्यों हैं? 20. 20 अगस्त 2013 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय को उनका वाजिब हक़ दिलाने के लिए अल्पसंख्यकों को 30 विभिन्न विभागों में संचालित 85 योजनाओं में 20 प्रतिशत मात्राकृत लाभान्वित किए जाने का जो वादा किया था, उसे क्यों नहीं पूरा किया गया? 21. 25 अक्टूबर 2013 की घोषणा के अनुसार स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना के अन्तर्गत मुस्लिमों को 20 प्रतिशत लाभान्वित किया जाना था, जिसमें से स्वर्ण जयंती शहरी योजना अंतर्गत 6 उपयोजनाएं संचालित तो हुईंलेकिन 31 मार्च 2014 को समाप्त कर दी गईं. इस मद के लिए जो पैसा था वह कहां खर्च हुआ? 22. उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा मानने के बावजूद अखिलेश सरकार के कार्यकाल में सरकारी कामकाज में महत्वपूर्ण सरकारी नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों समेत गज़ट का अनुवाद उर्दू भाषा में क्यों नहीं होता? 23. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबीफारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली में उर्दू/अरबी/फारसी के अंक अन्य विषयों की तरह अंक-पत्र में न जोड़े जाने के निर्णय से उक्त विश्वविद्यालय के स्थापना के मक़सद को ही ख़त्म कर दिया गया. ऐसा क्यों किया गया? 24. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति में उर्दू की अनिवार्यता को क्यों समाप्त कर दिया गया? 25. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ में एक भी नई फैकल्टी क्यों नहीं खोली गई? 26. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ से मदरसों को जोड़ने के बजाय उसे मदरसों से दूर क्यों किया गया? 27. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति, रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, ओएसडी, फाइनेंसर कोई भी उर्दू भाषा की डिग्री प्राप्त क्यों नहीं है? 28. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली उर्दू भाषा में क्यों नहीं? 29. रफीकुल मुल्क मुलायम सिंह यादव आईएएस उर्दू स्टडी सेंटर में मात्र 50 सीट जबकि प्रदेश में 75 जिले हैं. पढ़ाई का माध्यम उर्दू भाषा नहीं और कोई पद स्थाई नहीं, आखिर ऐसा क्यों? 30. उर्दू की प्रोन्नति के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों में प्राइमरी, मिडिल व हाई स्कूल स्तर पर सरकारी उर्दू मीडियम स्कूलों की स्थापना क्यों नहीं की गई? 31. अखिलेश सरकार के कार्यकाल में यूपी में एक भी यूनानी मेडिकल कालेज की स्थापना क्यों नहीं की गई? 32. यूपी के किसी भी यूनानी चिकित्सालय में नर्स और फार्मासिस्ट की नियमित नियुक्ति क्यों नहीं? 33. यूनानी चिकित्सा पद्धति जिसका कोर्स उर्दू भाषा में है, उसके नर्स और फार्मासिस्ट के कोर्स से उर्दू को क्यों बाहर किया गया? 34. यूनानी चिकित्सा पद्धति की 2008 से आज तक कोई भी नियमावली नहीं बनी व स्थाई निदेशक क्यों नहीं नियुक्त हुआ? 35. मुसलमानों के वह शैक्षिक संस्थान जो विश्वविद्यालय की शर्तों पर पूरा उतरते हैं, उन्हें कानून के तहत यूनीवर्सिटी का दर्जा देने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया? 36. अखिलेश सरकार ने आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से अधिक पिछ़ड़ा मानते हुए दलितों की तरह दलित मुस्लिमों को जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण क्यों नहीं दिया? 37. सपा सरकार द्वारा बनाए गए मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की सभी कानूनी बाधाएं समाप्त करने की बात तो की गई थी, लेकिन क्या अच्छा होता कि इस विश्वविद्यालय को सरकारी विश्वविद्यालय के रूप में बनाया गया होता, क्योंकि यह विश्वविद्यालय भी डोनेशन की बुनियाद पर ही प्रवेश देता है, जिससे गरीब जनता को सीधा लाभ नहीं पहुंच रहा है. उक्त क्षेत्र में प्राइवेट कई विश्वविद्यालय मौजूद हैं, जबकि बरेली से लेकर मेरठ तक 200 किमी के परिक्षेत्र में एक भी सरकारी विश्वविद्यालय नहीं है. सरकार ने उक्त क्षेत्र में कोई सरकारी विश्वविद्यालय क्यों नहीं बनवाया जिससे जनता को सीधा लाभ पहुंचता? 38. मुस्लिम बहुल जिलों में नए सरकारी शैक्षिक संस्थानों की स्थापना क्यों नहीं की गई?39. क़ब्रिस्तानों की भूमि पर अवैध क़ब्जे को रोकने व भूमि की सुरक्षा के लिए चारदीवारी के निर्माण पर कार्य क्यों नहीं किया गया? 40. दरगाहों के सरंक्षण व विकास हेतु दरगाह ऐक्ट का वादा क्यों पूरा नहीं किया गया और स्पेशल पैकेज के वादे का क्या हुआ? 41. वक्फ़ डाटा कम्प्यूटरीकृत स्कीम के तहत आज तक वक्फ़ के सारे डाटा कम्प्यूटरीकृत क्यों नहीं किए गए?